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मां के नाम कविता; मां की महिमा का किया गुणगान, साहित्यकारों ने दी काव्यांजलि

स्वर्गीय श्रीमती दुर्गा पाठक की स्मृति में एक कविता मां के नाम कार्यक्रम का आयोजन... तू दिखती बलिदान में, धड़के सेना के जवान में। मां भारती के रूप में दिखती,तू तिरंगा निशान में...

रिपोर्टर दिलीप कुमरावत MobNo 9179977597

मनावर। जिला धार।। शहर की मूर्धन्य साहित्यकार स्व. श्रीमती दुर्गा पाठक के दसवें पुण्य स्मरण दिवस पर शगुन संस्था द्वारा प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी ‘एक कविता मां के नाम’ काव्यांजलि कार्यक्रम का आयोजन सिंघाना स्थित निजी स्कूल में किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों और विद्यार्थियों ने मां की ममता, त्याग, समर्पण और राष्ट्रभक्ति पर आधारित रचनाओं का पाठ कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथि किशोर कुमार बागेश्वर, भरत बरफा, गोविंद सेन एवं अध्यक्षता कर रहे साहित्यकार विश्वदीप मिश्रा ने दीप प्रज्वलित कर किया। अध्यक्षता कर रहे विश्वदीप मिश्रा ने मां की महिमा और राष्ट्रभक्ति का मर्मस्पर्शी चित्रण करते हुए रचना प्रस्तुत की— “तू दिखती बलिदान में, धड़के सेना के जवान में। मां भारती के रूप में दिखती, तू तिरंगा निशान में।”

साहित्यकार अल्का पंडित बड़वानी ने मां को समर्पित कविता में कहा, “काव्य की धारा सी थी तुम, रचनाओं की अद्भुत गजल सी थी तुम।” संदीप जाजमे ने मां की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि ईश्वर को भी मां ने जन्म दिया है। वरिष्ठ साहित्यकार गोविंद सेन ने मां के त्याग और समर्पण को रेखांकित करते हुए रचना पाठ किया— “मां ममता की है नदी, बहती है अविराम, उसने जीवन कर दिया संतानों के नाम।”

किशोर बागेश्वर, योगिता उपाध्याय और दीपक पटवा ने भी मां की ममता पर आधारित रचनाएं प्रस्तुत कीं। कुलदीप पंड्या ने ‘चढ़ावा चोरी’ और छात्र आंदोलन जैसे समसामयिक विषयों पर अपनी रचनाओं के माध्यम से तीखा प्रहार किया। राजा पाठक ने पैरोडी के माध्यम से विद्यार्थियों को मोबाइल के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया।

काव्य गोष्ठी में पंकज प्रखर, अरविंद पंड्या अंजड़, अनिका पाठक सहित अन्य साहित्यकारों ने काव्य पाठ किया। शुभी पाठक ने मां पर आधारित गीत प्रस्तुत किया। जन शिक्षक ओमप्रकाश राठौर ने अतिथियों एवं साहित्यकारों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन मुकेश मेहता ने किया, जबकि आभार शालिनी पाठक ने माना।

कार्यक्रम में साहित्यप्रेमियों, विद्यार्थियों एवं गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता कर स्व. दुर्गा पाठक की साहित्यिक स्मृतियों को नमन किया।

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